ईरान अमेरिका की जंग का असर अब हमारी आपकी जेब पर भी पड़ने लगा है। प्रीमियम पेट्रोल का भाव दो रुपये प्रति लीटर बढ़ गया, इंडस्ट्रियल डीज़ल का भाव 22 रुपये प्रति लीटर बढ़ गया। सरकार ने माना कि मध्यपूर्व में जंग के कारण कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई पर संकट है, हमारे देश में पर्याप्त स्टॉक है लेकिन स्थिति गंभीर हैं। ऐसे हालात कब तक बने रहेंगे, ये किसी को नहीं मालूम।
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इज़राइल के पीएम बेंजामिन नेतान्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बात मान ली है और ये कह दिया है कि अब इजराइल ईरान के गैस और तेल ठिकानों पर बमबारी नहीं करेगा लेकिन खाड़ी के देशों सऊदी अरब, अमीरात और कुवैत की रिफायनरी पर ईरान के हमले जारी हैं। इन हमलों से जो नुकसान हुआ है, उसे दुरुस्त करने में कम से कम आठ महीने लगेंगे , इसीलिए तेल और गैस के दामों में आग लगी है।
ईरान को अब ये समझ आ गया कि गैस और तेल अमेरिका की कमजोर नस है। खाड़ी के देशों को तेल और गैस ठिकानों पर हुए हमलों से सबसे ज्यादा चोट पहुंची है। ईरान ने पिछले तीन हफ्तों में एक दर्जन से ज्यादा जहाजों पर हमले किए हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ का इलाका ट्रंप के गले की हड्डी बन गया है। पूरी दुनिया से अकेले लड़ने की ताकत रखने वाले डॉनल्ड ट्रंप को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के संकट ने दूसरे देशों से मदद मांगने के लिए मजबूर कर दिया।
ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के खतरे को आंकने में गलती की और उसका खामियाज़ा दुनिया को भुगतना पड़ रहा है। इस बात में कोई शक नहीं कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे ताकतवर थल सेना, नौसेना और वायु सेना है। इज़राइल की लड़ने की क्षमता का पूरी दुनिया लोहा मानती है। इसीलिए दुनिया इस बात पर हैरान है कि ईरान अभी तक मिसाइल और ड्रोन से पूरे मध्य पूर्व पर कैसे हमले कर रहा है?
ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि ईरान की नौसेना और वायु सेना को तबाह कर दिया है, ईरान के आसमान में अमेरिकी वायु सेना कभी भी आ जा सकती है तो फिर ईरान ने अमेरिका के F-35 जैसे अत्याधुनिक विमान को कैसे मार गिराया? ये वो फाइटर विमान हैं, जो किसी भी रेडार की पहुंच से बाहर रहने की क्षमता रखते हैं।
दूसरी बात ये कि अमेरिका इस जंग पर अरबों डालर खर्च कर रहा है और इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि ईरान इस जंग को जल्दी खत्म होने देगा। शुक्रवार को जब अमेरिका ने खाड़ी के देशों को एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइल बेचने की डील की, तो लोगों ने कहा कि अमेरिका अपने हथियार बेचने के लिए इस लड़ाई को लंबा खींच रहा है।
ऐसी बातों के कोई सबूत तो नहीं होते लेकिन पूरी दुनिया में ये इम्प्रेशन जरूर बना है कि ट्रंप ने ईरान की ये जंग पूरी दुनिया पर थोप दी और उन्होंने ऐसा क्यों किया इसका कोई ठोस औचित्य अभी तक नहीं मिल पाया है। (रजत शर्मा)
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